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राहुल-अखिलेश का बड़ा कदम, चुनाव आयोग के खिलाफ याचिका
दिल्ली। चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी दलों ने विरोध तेज कर दिया है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की जानकारी दी है। विपक्ष ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की है। वहीं, मुंबई में शिवसेना (यूबीटी) के विधायक आदित्य ठाकरे ने भी कथित वोट चोरी के आरोप दोहराए हैं।
धर्मेंद्र यादव बोले- लोकतंत्र बचाने के लिए हर रास्ता अपनाएंगे
समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि विपक्ष के सभी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव, राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के अन्य नेता लोकतंत्र में उपलब्ध हर संवैधानिक रास्ते को अपनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। धर्मेंद्र यादव ने चुनाव आयोग पर कथित अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतंत्र, बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान और नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा करना जरूरी है। उन्होंने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और ईमानदारी को लोकतंत्र की मजबूती का महत्वपूर्ण आधार बताया।
डी राजा ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग की
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव डी राजा ने कहा कि उनकी पार्टी ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने दावा किया कि देशभर में चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। डी राजा ने मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफा देने या उन्हें पद से हटाए जाने की मांग की। उन्होंने आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट से मामले पर विचार करने का आग्रह किया।
सुक्खू और शिवकुमार ने भी उठाए सवाल
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि गठबंधन के सभी सहयोगियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। वहीं, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने नागरिकों के अधिकारों की रक्षा पर जोर देते हुए एसआईआर प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की।
आदित्य ठाकरे ने लगाए वोट चोरी के आरोप
मुंबई में शिवसेना (यूबीटी) विधायक आदित्य ठाकरे ने कहा कि विपक्ष राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को कथित वोट चोरी से संबंधित दस्तावेज और सबूत सौंपेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 में केंद्र सरकार कथित चुनावी अनियमितताओं के जरिए सत्ता में आई। हालांकि, विपक्ष के ये आरोप अभी न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं पर आगे की सुनवाई और न्यायालय के फैसले से मामले की स्थिति स्पष्ट होगी। निर्वाचन आयोग ने पक्षपात के आरोपों से इनकार किया है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची से गलत तरीके से नाम हटाए जाने की स्थिति में पात्र नागरिक दोबारा नाम जुड़वाने की प्रक्रिया अपना सकते हैं।
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